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​संभोग से समाधि की ओर – ओशो

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​ओशो द्वारा रचित ‘संभोग से समाधि की ओर’ एक अत्यंत क्रांतिकारी और जीवन बदलने वाली पुस्तक है। यह किताब कामवासना को पाप मानकर दबाने या उससे भागने के बजाय, उसे गहराई से समझने की प्रेरणा देती है। ओशो ने इस पुस्तक में बताया है कि कैसे इस प्राकृतिक ऊर्जा को स्वीकार करके और ध्यान के माध्यम से रूपांतरित करके, मनुष्य आध्यात्मिक जागृति और चेतना के सर्वोच्च शिखर (समाधि) तक पहुँच सकता है।

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​ओशो (Osho) की यह पुस्तक दुनिया की सबसे चर्चित, साहसिक और क्रांतिकारी पुस्तकों में से एक है। सदियों से समाज और पारंपरिक धर्मों ने कामवासना को पाप माना है और इसे दबाने (Repression) की शिक्षा दी है। लेकिन ओशो इस किताब में एक बिल्कुल नया, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि “काम-ऊर्जा ही जीवन-ऊर्जा है,” और इसे दबाने से मनुष्य केवल मानसिक रूप से विकृत होता है, मुक्त नहीं।
​इस पुस्तक में ओशो ने समझाया है कि संभोग कोई अंत नहीं है, बल्कि यह एक शुरुआत हो सकती है। यदि इसे ध्यान (Meditation) और प्रेम के साथ जिया जाए, तो यही ऊर्जा सीढ़ी बनकर मनुष्य को चेतना के सर्वोच्च शिखर यानी ‘समाधि’ तक ले जा सकती है।
इस पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
ऊर्जा का आध्यात्मिक रूपांतरण: यह किताब सिखाती है कि संभोग की प्राकृतिक ऊर्जा को नष्ट या दमित करने के बजाय, उसे आध्यात्मिक ऊर्जा में कैसे बदला जाए।
अपराधबोध (Guilt) से मुक्ति: समाज द्वारा थोपी गई वर्जनाओं, भय और अपराधबोध से मुक्त होकर जीवन को उसकी समग्रता में जीने की कला।
गहरा मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: ओशो ने मानव मन, उसकी कुंठाओं और उसके समाधान का अत्यंत तार्किक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है।
ध्यान और प्रेम का मार्ग: कैसे शारीरिक आकर्षण और वासना को ध्यान के जरिए आत्मिक शांति और परम आनंद में बदला जा सकता है।
​यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?
​जो लोग अध्यात्म, ध्यान और मानव मनोविज्ञान को गहराई से समझना चाहते हैं।
​जो समाज की पुरानी रूढ़ियों से परे जाकर जीवन के सत्य की तलाश में हैं।
​ओशो के दर्शन और उनके बेबाक विचारों को जानने के इच्छुक पाठकों के लिए यह एक ‘मस्ट-रीड’ (Must-Read) पुस्तक है।
उत्पाद विवरण (Product Details):
​लेखक: ओशो (Osho)
​भाषा: हिंदी (Hindi)
​विषय: अध्यात्म, दर्शन, मनोविज्ञान (Spirituality, Philosophy, Psychology)
​”कामवासना जीवन का बीज है, उसे नकारें नहीं, बल्कि उसका अतिक्रमण करें।”
— आज ही अपनी प्रति ऑर्डर करें और चेतना के रूपांतरण की इस अद्भुत यात्रा का हिस्सा बनें!

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